फ्लाइंग सिख किसे कहते हैं पूरी जानकारी

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flying sikh kise kaha jata hai

दोस्तो क्या आप जानते हो की भारत का फ्लाइंग सिख किसे कहा जाता है या फ्लाइंग सिख किसे कहते हैं और फ्लाइंग सिख की उपाधि इन्हे किसने दी थी  और फ्लाइंग सिख का जन्म कहा हुआ तो इनके बारे में इस पोस्ट में विस्तार से जानकारी देगे तो इसे अंत तक पढ़े।

फ्लाइंग सिख किसे कहा जाता है ?

फ्लाइंग सिख’ के नाम से मिल्खा सिंह को जाना जाता है जिन्होंने हाल ही में दुनिया को अलविदा कह दिया. भारत के महान फर्राटा धावक मिल्खा सिंह का एक  19 जून 2021 को निधन हो गया मिल्खा सिंह 91 साल के थे, मिल्खा सिंह भारत के खेल इतिहास के सबसे सफल एथलीट थे

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु से लेकर पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान तक सब मिल्खा के हुनर के दीवाने थे 1958 ओलंपिक मेें इतिहास रचने वाले मिल्खा सिंह ने दूसरी बार 1960 के ओलंपिक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

ये उनकी काफी चर्चित रेस रही। इस रेस में फ्लाइंग सिख कांस्य पदक से चूक गए थे। वे तब चौथे स्थान पर रहे मगर उनका 45.73 सेकंड का ये रिकॉर्ड अगले 40 साल तक नेशनल रिकॉर्ड रहा।

मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख की उपाधि किसने दी थी?

मिल्खा सिंह को उड़न सिख का खिताब पाकिस्तान में मिला था। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने उन्हें उड़न सिख (फ्लाइंग सिख) की पदवी से नवाजा था साल 1960 में मिल्खा को पाकिस्तान की ओर से लाहौर में दौड़ने का आमंत्रण मिला लेकिन भारत-पाक बंटवारे के बाद हुए दंगों से दुखी मिल्खा सिंह ने निमंत्रण ठुकरा दिया।

उनकी आंखों के सामने दंगों में मारे गए लोगों की लाशों के दृश्य घूम रहे थे।  तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मिल्खा को बुलाया और समझाया कि पुरानी बातें भूलकर लाहौर जाओ। इसके बाद मिल्खा बाघा बार्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे मिल्खा सिंह भारत के इकलौते ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 400 मीटर की दौड़ में एशियाई खेलों के साथ साथ कॉमनवेल्थ खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता।

उन्होंने 1962 में भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान रह चुकी निर्मल कौर से विवाह किया था. निर्मल कौर से उनकी पहली मुलाकात कोलंबो में हुई थी. उनके 4 बच्चे हैं, जिनमे 3 बेटियां और एक बेटा है. उनके बेटे जीव मिल्खा सिंह एक नामी गोल्फर हैं।

अधिकतर लोगों को लग रहा था कि मिल्खा सिंह हार जाएंगे लेकिन जो हुआ, वो इतिहास बन गया। मिल्खा सिंह ऐसे दौड़े जैसे वे उड़ रहे हों। उन्होंने रेस जीत ली। इस रेस को पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान भी देख रहे थे।

और उन्होंने मिल्खा सिंह के गले में मेडल डालते हुए पंजाबी में कहा, मिल्खा सिंह जी, तुस्सी पाकिस्तान दे विच आके दौड़े नई, तुस्सी पाकिस्तान दे विच उड़े ओ,आज पाकिस्तान तुहानूं फ्लाइंग सिख दा खिताब देंदा ए ’ उसके बाद से वे उड़न सिख के नाम से मशहूर हो गए।

मिल्खा सिंह का जन्म कहा हुआ था ?

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को गोविंदपुरा (अब पाकिस्तान) में किसान परिवार में हुआ था  वे भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ एथलीट्स में से एक थे। वे एक सिक्ख जाट परिवार से थे। उनका पूरा नाम मिल्खा सिंह था।

वह अपने अपने मां-बाप की कुल 15 संतानों में से एक थे. उनका परिवार विभाजन की त्रासदी का शिकार हो गया, उस दौरान उनके माता-पिता के साथ आठ भाई-बहन भी मारे गए. इस खौफनाक मंजर को देखने वाले मिल्खा सिंह पाकिस्तान से ट्रेन की महिला बोगी में छिपकर दिल्ली पहुंचे।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मिल्खा सिंह  के बारे में क्या कहा ?

मिल्खा सिंह के निधन के साथ एक युग के अंत पर पूरे देश ने शोक जताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने एक ‘बहुत बड़ा’ खिलाड़ी खो दिया. मोदी ने ट्वीट किया, ‘मिल्खा सिंह जी के निधन से हमने एक बहुत बड़ा खिलाड़ी खो दिया, जिनका असंख्य भारतीयों के ह्रदय में विशेष स्थान था

अपने प्रेरक व्यक्तित्व से वे लाखों के चहेते थे. मैं उनके निधन से आहत हूं.’ उन्होंने आगे लिखा, ‘मैंने कुछ दिन पहले ही श्री मिल्खा सिंह जी से बात की थी. मुझे नहीं पता था कि यह हमारी आखिरी बात होगी. उनके जीवन से कई उदीयमान खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी. उनके परिवार और दुनियाभर में उनके प्रशंसकों को मेरी संवेदनाएं ’है।

मिल्खा सिंह को कोन कोन से पुरस्कार मिले है?

चार बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिल्खा ने 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा हासिल किया था. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हालांकि 1960 के रोम ओलंपिक में था, जिसमें वह 400 मीटर फाइनल में चौथे स्थान पर रहे थे. उन्होंने 1956 और 1964 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. उन्हें 1959 में पद्मश्री से नवाजा गया था

1. इन्होंने 1956 के राष्ट्रमण्डल खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

2. वर्ष 1958 के एशियाई खेलों की 400 मीटर रेस में – प्रथम स्थान पर रहे।

3. वर्ष 1959 में – पद्मश्री पुरस्कार

4. वर्ष 1958 के एशियाई खेलों की 200 मीटर रेस में – प्रथम

आदि पुरुस्कार दिए गए है ।भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने ट्वीट किया, ‘राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मिल्खा सिंह के नाम 400 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 38 साल तक रहा. उनके परिवार और उन लाखों लोगों के प्रति संवेदना जिन्हें उन्होंने प्रेरित किया. है।

मिल्खा सिंह ने 400 मीटर की रेस का रिकॉर्ड कैसे बनाया था?

मिल्खा सिंह ने अपने करियर के दौरान करीब 75 रेस जीती थीं. वह 1960 ओलंपिक में 400 मीटर की रेस में चौथे नंबर पर रहे. उन्हें 45.73 सेकंड का वक्त लगा था. उनका यह कारनामा 40 साल तक रिकॉर्ड रहा था ।

मिल्खा सिंह को बेहतर प्रदर्शन के लिए 1959 में पद्म अवार्ड से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 2001 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से भी सम्मानित दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था ।

मिल्खा सिंह कितना पढ़े थे ?

दोस्तो मिल्खा सिंह ने ज्यादा पढ़ाई नही की है उनकी पढ़ाई की शुरुआत पाकिस्तान के एक गांव के स्कूल में हुई थी और करीब पांचवी कक्षा तक उन्होंने पढ़ाई की थी. मिल्खा सिंह बचपन में जिस स्कूल जाते थे वह उनके घर से 10 किलोमीटर दूर था. इसलिए वह रोजाना घर से स्कूल और स्कूल से घर 10-10 किलोमीटर दौड़ा करते थे ।

चार बार कोशिश करने के बाद हुआ था सेना में चयन  1951 में मिल्खा सिंह सेना में भर्ती हुए. कहा जाता है कि भर्ती के दौरान हुई क्रॉस-कंट्री रेस में वो छठे स्थान पर आए थे, इसलिए सेना ने उन्हें खेलकूद में स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चुना था।

 

उम्मीद है इस पोस्ट में आपको जानकारी मिल गई होगी फ्लाइंग सिख किसे कहा जाता है और मिल्खा सिंह को क्या हुआ है फ्लाइंग सिख की उपाधि मिल्खा सिंह को किसने दी और मिल्खा सिंह का जन्म कब हुआ था साथ ही हमने पोस्ट में आपको मिल्खा सिंह के बारे में पूरी जानकारी बताइए

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