भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय कौन सा है ?

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क्या आपको पता है की भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय कौन सा है  और भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय किस राज्य में स्थित है भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी आपने इस से संबंधित कही प्रश्न  एग्जाम में भी देखे होगे  तो इन सब बातो को जानने के लिए इस पोस्ट को पूरा पड़े

भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय कौन सा  है ? 

 

भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्याल नालंदा विश्वविद्यालय है जो भारत के बिहार के नालंदा जिले में स्थित है नालंदा प्राचीन भारत में उच्च शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विख्यात केन्द्र था यह  महायान बौद्ध धर्म के इस शिक्षा-केन्द्र में हीनयान बौद्ध-धर्म के साथ ही अन्य धर्मों के तथा अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे ।

इस जिले का नामकरण इस प्राचीन विश्वविद्यालय के सम्मान में रखा गया था नालंदा विश्वविद्यालय को आज भी पूरी दुनिया बहुत सम्मान के साथ याद करती है अपने समय में यह दुनिया का सबसे महान शिक्षा केन्द्र माना जाता था, जहां पूरी दुनिया से विद्यार्थी विद्या अध्ययन करने आते थे इस विश्वविद्यालय को भारत का गौरव स्थल माना जाता है ।

आपको बता दें कि नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास करीब ढाई हजार साल पुराना है. यह उस वक्त एशिया में शिक्षा का सबसे बड़ा केन्द्र था. इसकी विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक समय में इसमें 10 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे और 1 हजार 500 शिक्षक उन्हें ज्ञान देने का काम किया करते थे।

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी ?

 

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने की इसके  स्थापना के बाद इसे सभी शासक वंशों का समर्थन भी मिलता गया। महान शासक हर्षवर्धन ने भी इस विश्वविद्यालय के लिए दान दिया।

इस विश्वविद्यालय को विदेशी शासकों की भी सहायता मिली नालंदा विश्वविद्यालय के मठों का निर्माण प्राचीन कुषाण वास्तुशैली से हुआ था। यहाँ की सभी इमारतों का निर्माण लाल पत्थर से किया गया है। आज भी हम इस विश्वविद्यालय की मुख्य दो मंजिला इमारत देख सकते हैं।

माना जाता है कि शायद यहीं शिक्षक अपने छात्रों को संबोधित किया करते थे। इस विश्वविद्यालय में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, फारस तथा तुर्की से भी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे।

 

 

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कब की गई?

 

दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटियों में से एक है नालंदा यूनिवर्सिटी इसकी स्थापना 450 ई में  हुई थी पटना से यह  90 किलोमीटर दूर और बिहार शरीफ से करीब 12 किलोमीटर दक्षिण में, विश्व प्रसिद्ध प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय, नालंदा के खंडहर स्थित  है।

यहां पर विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर होता था और निःशुल्क शिक्षा दी जाती थी। इसके साथ उनका रहना और खाना भी पूरी तरह निःशुल्क था।  आपको बता दें कि नालंदा की स्थापना का उद्देश्य ध्यान और आध्यात्म के लिए स्थान बनाने से था। ऐसा भी कहा जाता है कि गौतम बुद्ध ने कई बार यहां की यात्रा की और यह रुके  भी थे।

इस विश्वविद्यालय में तीन श्रेणियों के आचार्य थे जो अपनी योग्यतानुसार प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी में आते थे। नालंदा के प्रसिद्ध आचार्यों में शीलभद्र, धर्मपाल, चंद्रपाल, गुणमति और स्थिरमति प्रमुख थे।

 

नालंदा विश्वविद्यालय किस शिक्षा से समंधित था ?

 

यह महायान बौद्ध धर्म के शिक्षा-केंद्र में हीनयान बौद्ध धर्म के साथ ही अन्य धर्मों की शिक्षा  तथा  यह अनेक देशों के छात्र पढ़ते थे  यहां धर्म ही नहीं, राजनीति, शिक्षा, इतिहास, ज्योतिष, विज्ञान आदि की भी शिक्षा दी जाती थी।

ऐसा माना जाता है कि महात्मा बुद्घ कई बार यहाँ आए। इसी वजह से पाँचवी शताब्दी से लेकर बारहवीं शताब्दी तक इसे बौद्घ शिक्षा के केन्द्र के रूप में भी जाना जाता था यह दुनिया का पहला आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय था  यहाँ दुनियाभर से आकर 10000 छात्र अध्ययन किया करते थे और ये सब इसी विश्वविद्यालय में रहते भी थे। यहाँ एक प्रार्थनागृह आज भी सुरक्षित अवस्था में है। इसमें भगवान बुद्घ की प्रतिमा रखी हुई है, परंतु वह थोड़ी खंडित हो गई है। इसके अलावा भी यहाँ बहुत से मंदिर हैं।

मंदिर नंबर 3 से इस पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यह बुद्घ का मंदिर है, जिसमें कई छोटे-बड़े स्तूप हैं तथा प्रत्येक में भगवान बुद्घ की मूर्ति स्थापित है जबचीनी यात्री ह्वेनसांग  भारत आया था,

उस समय नालंदा विश्‍वविद्यालय में 8,500 छात्र एवं 1,510 अध्यापक थे।  साथ ही साथ वेद, विज्ञान, खगोलशास्त्र, सांख्य, वास्तुकला, शिल्प, मूर्तिकला, व्याकरण, दर्शन, शल्यविद्या, ज्योतिष, योगशास्त्र तथा चिकित्साशास्त्र भी पाठ्यक्रम में शामिल थे। इससे पता चलता है कि बौद्ध शासन होने के बावजूद बौद्धों ने कभी दूसरे धर्मों के अनुयायियों के साथ भेदभाव नहीं किया था।

 

उम्मीद है इस पोस्ट में आपको जानकारी मिल गई होगी कि भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय कौन सा है ? और भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय किस राज्य में स्थित है ? भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी ? इन सभी की जानकारी आपको इस पोस्ट में विस्तार के साथ मिलेगी अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे जरूर सोशल मीडिया पर शेयर करें ।

 

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